मोदी ने नहीं की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से कोई बात

शंघाई सहयोग संगठन की 19वीं बैठक के उद्घाटन समारोह में कई राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया. संयोग से पीएम मोदी और इमरान खान हॉल में एक साथ ही पहुंचे. लेकिन पीएम मोदी ने इमरान खान से ना हाथ मिलाया और ना ही कोई अनौपचारिक बात की. उन्होंने इमरान खान को देखा तक नहीं और वह सीधे अपनी सीट पर जाकर बैठ गए. इमरान की कुर्सी बिल्कुल कोने में थी और वह पीएम मोदी से पांच-छह सीट छोड़कर बैठे थे.

अन्य देशों से मिले गर्मजोशी से

पीएम मोदी विश्व के अन्य नेताओं के स्वागत में खड़े हुए और उनसे हाथ भी मिलाया लेकिन इमरान खान को स्पष्ट संदेश दे दिया कि मंच चाहे कोई भी हो, आतंकवाद को खत्म किए बिना पाकिस्तान के प्रति उनका रुख नहीं बदलने वाला है.इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय वार्ता की और आतंकवाद का मुद्दा उठाया. पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को वार्ता शुरू करने के लिए आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिनपिंग को बताया कि उन्होंने पाकिस्तान से संबंध सुधारने के कई प्रयास किए, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ. पाक को आतंक मुक्त वातावरण बनाने की जरूरत है और फिलहाल हम ऐसा होता नहीं देख रहे हैं.

वहीं, एक रूसी न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान-भारत के रिश्ते सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए हैं. खान ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि मोदी बहुमत का इस्तेमाल सभी विवादों को सुलझाने में करेंगे. बिश्केक जाने से पहले भी इमरान ने कहा था कि इस मंच पर भारत समेत तमाम देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने का मौका होगा.

चुना था लंबा रास्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में हो रही SCO समिट में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल ना करते हुए ओमान से होकर जाने वाला लंबा रूट चुना था. बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया था. पाकिस्तान ने पीएम मोदी के लिए अपने एयरस्पेस का रास्ता खोल दिया था, इसके बावजूद पीएम मोदी ने पाकिस्तान वाले रास्ते को छोड़कर दूसरा रूट चुना था.

पुलवामा आतंकी हमले और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट चरम पर है. पाकिस्तान की ओर से लगातार वार्ता की पेशकश की जा रही है. लेकिन भारत का साफ कहना है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद पर लगाम नहीं लगती, दोनों देशों के बीच कोई वार्ता नहीं होगी.