फिर कुछ भी फेंक गए प्रधानमंत्री मोदी जी ! तकनीक के आने से पहले ही किया इस्तेमाल

चुनाव ख़त्म हो रहे हैं और प्रधानमंत्री के इंटरव्यू विवाद बढ़ाते जा रहे हैं. मोदी जी का राजनीतिक इंटरव्यू हो या फिर गैर-राजनीतिक इंटरव्यू दोनों ही विवादों को जन्म देने में माहिर हैं. पिछले 15 दिनों में मोदी जी ने काफी इंटरव्यू किए हैं. कभी गंगा के घाट पर तो कभी अपने आवास पर. पार्कों से लेकर स्टूडियो रूम तक उनका जलवा दिखा. परन्तु मोदी जी मनमोहन सिंह के बिलकुल विपरीत हैं. वो जितना कम बोलते हैं और जितने कम विवादों को जन्म देते हैं, मोदी जी उतना ही ज्यादा बोलते हैं और विवाद तो हर इंटरव्यू में होता है. वैसे उनकी इसी वाक् कला का देश और मै खुद भी प्रशंसक हूँ, परन्तु आजकल वो कुछ भी बोलने लगे हैं. बिना तर्कों के, बिना मर्यादाओं के. मोदी जी ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया की उन्होंने डिजिटल कैमरे का इस्तेमाल 1987-88 में किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दरअसल भारत में इन्टरनेट, डिजिटल कैमरा और ईमेल के आने का मोदी जी ने अध्यन नहीं किया और ये सब बोल गए.

क्या बोले मोदी जी

‘शायद, मैंने पहली बार डिजिटल कैमरा का उपयोग किया, 1987-1988 में और उस समय काफी कम लोगों के पास ईमेल रहता था. मेरे यहां विरमगाम तहसील में आडवाणी जी की रैली थी, मैंने डिजिटल कैमरा पर उनकी फोटो खींच कर दिल्ली को ट्रांसमिट की. अब ऐसे ब्यान पर ट्रोल तो होना बनता है भाई.

क्या बोले लोग सोशल मीडिया पर

सोशल मीडिया पर कई आम यूजर्स और बुद्धिजीवी इस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं. इकॉनोमिस्ट रूपा सुब्रमण्या ने लिखा कि 1988 में पश्चिमी देशों में भी कुछ ही वैज्ञानिकों के पास ही ईमेल था, लेकिन पीएम मोदी ने 1988 में ही हिंदुस्तान में ईमेल का इस्तेमाल कर लिया था. जबकि बाकी देश के लिए 1995 में इसका इस्तेमाल लागू हुआ. वायरल वीडियो के जवाब में शाहिद अख्तर ने लिखा है कि पहला डिजिटल कैमरा 1990 में बिक्री के लिए सामने आया था. ये लोजिटेक फोटोमैन का ग्रे वर्ज़न था. लेकिन पीएम मोदी के पास ये 1988 में ही था. इसके अलावा तब उन्होंने इंटरनेट का भी इस्तेमाल कर लिया था, जबकि भारत में 14 अगस्त, 1995 में इंटरनेट आया था. गौरतलब है कि भारत में आम जन के लिए इंटरनेट की सुविधा विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) के द्वारा जारी की गई थी.

विपक्षी पार्टियों ने भी ली चुटकी

AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी लिखा कि प्रधानमंत्री के पास बटुआ नहीं था, क्योंकि पैसे नहीं थे. लेकिन 1988 में ईमेल और डिजिटल कैमरा था. मोदी लगातार ही बताते रहे हैं की उनका बचपन और जवानी दोनों ही काफी ग़रीबी में गुजरा है. वहीं कांग्रेस ने ट्वीट ने ट्वीट करके कहा की अब मत पूछना की कांग्रेस ने 60 सालों में क्या किया है.  कांग्रेस पार्टी के IT सेल की प्रमुख दिव्या स्पंदना ने भी प्रधानमंत्री के इस कथन पर टिप्पणी की है. दिव्या स्पंदना ने लिखा कि क्या आप सोच सकते हैं कि 1988 में नरेंद्र मोदी की ईमेल आईडी क्या थी? मुझे लगता है dud@lol.com

बालाकोट एयरस्ट्राइक पर भी उड़ा था मजाक

प्रधानमंत्री के इस बयान से पहले इसी इंटरव्यू में दिया गया बादल और रडार से जुड़ा बयान भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था. हालांकि, विवाद होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट हटा लिया था.

तब बालाकोट एयरस्ट्राइक पर प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘एयर स्ट्राइक के दिन मौसम ठीक नहीं था. उस दिन विशेषज्ञों का मानना था कि स्ट्राइक दूसरे दिन की जाए. लेकिन मैंने उन्हें सलाह दी कि वास्तव में बादल हमारी मदद करेंगे और हमारे लड़ाकू विमान रडार की नजरों में नहीं आएंगे.’

हार का है डर या नहीं होती नींद पूरी

कुछ लोगों का मानना है की मोदी जी को उनकी हार सामने दिखाई दे रही है इसलिए वो ऐसे ब्यान दे रहे हैं. परन्तु मेरा मानना है की शायद मोदी जी की नींद पूरी नहीं होती है, अब कोई इंसान 18 घंटे काम करेगा और सिर्फ 3-4 घंटे सोयेगा तो बेचारा कहाँ से होश में होगा और तथ्यों को याद रख पाएगा. बीजेपी और मोदी को ध्यान देना होगा इस बात पर. कहीं ऐसा ना हो की मोदी जी अगली बार कुछ ऐसा बोल जाए जिस पर नासा को भी रिसर्च करना पड़े. ऐसे ब्यान लगातार ही मोदी जी के प्रति लोगों की विश्वनीयता को कम करते जा रहा हैं. भाई आम खाने में जितना समय आप लगाते हैं उससे अच्छा जूस पी लीजिए और जो समय बच जाए, उसमे अपनी नींद पूरी कर लीजिए. अमित शाह को मोदी से बात करनी चाहिए, आखिर राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं वो भाई. व्यंग्यात्मक तरीके से आजकल खबर लिखना पड़ता है, वैसे पूरी राजनीति ही व्यंग्य हो गयी है अब.

खैर पार्टी और बीजेपी के कार्यकर्ता अब उनके इस बयान को सही करने की पूर्ण कोशिश करेंगे. कहीं इतिहास बदला जाएगा, तो कहीं अपने ही तथ्यों को लाकर प्रधानमंत्री को सही किया जाएगा, वैसे ये सिर्फ बीजेपी ही नहीं हर पार्टी की कहानी है. जब राहुल गाँधी ऐसा बोलते हैं तो उनकी पार्टी और उनके समर्थक भी यही करते हैं.