एक पेड़ की छांव में बैठा पूरा गाँव

कभी भी कुछ अच्छी बातें और कुछ अच्छी तस्वीरें भी वायरल हो जाते हैं. हमेशा बिना सुर वाले गाने और भड़काऊ पोस्ट ही वायरल नहीं होते हैं. अच्छा लगता है जब कुछ भी अच्छा वायरल होता है तो. परन्तु समस्या ये है की अच्छी बातें जितनी भी वायरल हो, लोग सीखते कुछ नहीं हैं. बेकार और फ़ालतू चीज बहुत जल्दी असर छोड़ती है. कई अच्छी पोस्ट भी थोडा असर तो छोड़ती ही हैं.  अभी सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही अच्छी पोस्ट वायरल  इस फोटों में करीब एक गांव जितनी जनसंख्‍या के लोग एक ही पेड़ के नीचे बैठे हुए हैं.  फोटो में एक जनसभा को संबोधित किया जा रहा है. इस फोटो को सोशल मीडिया पर जमकर लाइक, कमेंट और शेयर कर रहे हैं.

एक पेड़ के नीचे आया पूरा गाँव

इस वायरल फोटो में पूरा गाँव एक विशाल पेड़ के नीचे बैठा है. धुप से बचने के लिए सारा गाँव उस पेड़ की शरण में है. आमतौर पर इतने विशाल पेड़ नहीं होते हैं, परन्तु कुछ पेड़ इतने विशाल होते हैं. इस फोटो ने दिखा दिया की एक पेड़ कितने काम का होता है. एक पूरा गाँव सिर्फ एक पेड़ के कारण धूप से बच गया. 4-5 लोगों को नहीं बल्कि सैंकड़ो लोगों को बस एक पेड़ बचा रहा है. अगर ऐसे 10-10 पेड़ हर गाँव में हो तो कितना अच्छा होगा. शहरों में तो ऐसे 1-1 लाख पेड़ भी कम पड़ेंगे. पहले पेड़ इतने बड़े और लंबी आयु तक बचे रहते थे, परन्तु आजकल उनकी आयु और उनकी विशालता कम हो गयी है. प्रदुषण इसकी मुख्य वजह है.

सोशल मीडिया यूज़र्स ने किए ये कमेंट

वायरल हो रही फोटो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने खूब चुटकी ली है. नेहा नामक यूजर ने एक फिल्‍म के डॉयलाग एक चुटकी सिंदूर की कीमत तुम क्‍या जानो रमेश बाबू, की तरह ही एक पेड़ की कीमत तुम क्‍या जानों रमेश बाबू लिखा है. वहीं दीक्षांत नामक यूजर ने लिखा है कि पेड़ नहीं लगाए तो एक दिन हर जगह ऐसा ही हाल देखने को मिलेगा. वहीं स्‍नाया शर्मा ने लिखा है कि देश में हर साल 15 लाख लोग प्रदूषण से मर रहे हैं, मगर फिर भी पेड़ों का महत्‍व कोई नहीं समझ रहा. वहीं नीरजा ने लिखा है कि पेड़ सिखाते हैं कि बिना कुछ लिए देना कैसे सीखा जाए.

भारत में बचे हैं अब बस 35 अरब पेड़

बता दें कि एक पेड़ कार्बन डॉइ ऑक्‍ससाइड सोखते हैं और ऑक्‍सीजन छोड़ते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार एक पेड़ साल भर में करीब 21.7 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्‍साइड सोखता है और चार आदमियों को जरूरत होती है उतनी ऑक्‍सीजन छोड़ता है. ऐसे में पेड़ जीवनदाता हैं. वहीं एक अनुमान के अनुसार भारत देश में करीब 35 अरब पेड़ बचे हैं जो कि बाकि देशों की तुलना में कम हैं. पेड़ ऑ‍क्‍सीजन के अलावा कई तरह की जड़ी बूटियां बनाने और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करने में  भी सहायक है. कुछ शहरों में तो बिलकुल ना के बराबर ही पेड़ बचे हैं. दिल्ली जैसे शहर तो बिलकुल ही वीरान लगते हैं. प्रदुषण से बचाने वाले पेड़ धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं.

बड़े-बड़े प्रोजेक्ट के लिए पेड़ो का सफाया किया जा रहा है. आपको अब पेड़ नहीं बस पौधे मिलेंगे बड़ी-बड़ी बिल्डिंग के बालकनी में. और वो पौधे भी लोग इसलिए लगाते हैं की उनका घर खुबसूरत लगे, ऐसे पौधे नहीं लगाते लोग जो ऑक्सीजन दे और प्रदुषण स्तर कम करे. सरकार भी सड़क किनारे बस खुबसूरत पौधे लगाती है. उन्हें भी लगता है की बस यही विकास है. वैसे भारत ही नहीं पूरा विश्व इस समस्या से झुझ रहा है. पुरे विश्व में पेड़ कम होते जा रहे हैं. जल्दी ही सबको इस ओर ध्यान देना होगा.