नए गढ़वाली युवा गायकों को कपिल मोहन का मैशप्प मसाण

कुछ समय से मानो नए गानों कि रचना हो ही नहीं रही, गाने तो छोड़िये साउथ से लेकर बॉलीवुड तक मूवीज का कांसेप्ट भी चोरी हो जाता है, आज के दौर में इतना हुनर होने के बावजूद भी न जाने क्यों युवा एक कांसेप्ट या स्क्रिप्ट को अलग-अलग एंगल से दिखाने कि कोशिश करते रहते हैं ,जहाँ एक ओर सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद उत्तराखंड कि फिल्म इंडस्ट्री अपनी संस्कृति को बचाने में नाकाम रही, वही दूसरी ओर कुछ युवा गायक संस्कृति के नाम पर उत्तराखंड के जानी-मानी हस्तियों के पुराने गानों को गाकर ना जाने किस हुनर को दिखा रहे हैं और किस संस्कृति कि बात करते है जबकि उत्तराखंड दुनिया कि आरंभिक संस्कृति का जन्मस्थान है  दुनिया कि पहली वैधानिक शादी कैलाश्वाशी महादेव और पार्वती कि हुई जिसे आज त्रियुगी नारायण कहा जाता है,जहाँ आज भी संस्कृति बची हुई है।

या हम यूँ कहें कि भारतीय सभ्यता का मूल श्रोत उत्तराखंड है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं ।  इतनी समृद्ध संस्कृति का फिल्मांकन साउथ से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड ने कर लिया हो लेकिन सरकार के संघ्रालय में शायद ही उत्तराखंड कि संस्कृति और सभ्यता को उसके कालखंड में चरणबद्ध तरीके से संग्रहण किया गया हो। और उत्तराखंड में तो आजकल मानो बस मैशप्प का दौर चल रहा है उत्तराखण्ड के कई युवा सिंगरों ने तेजी से मैशपों की ओर रूख किया जिससे नये गीतों की रचनाओं में काफी कमी आ गयी है।इतिहास के साथ साथ

अब हाल ही में यूट्यूब में कपिल मोहन यूट्यूब चैनल पर DISSTRACK :100% PURE ORGANIC नाम से एक गढ़वाली गीत रिलीज़ किया गया। जिसमें इस गाने के जरिये बताया गया है कि उत्तराखंड कि युवा पीढ़ी किस कदर नयी रचनाओं को छोड़कर मैशप्प वाली संस्कृति को अपना रहे हैं और न जाने कब तक दूसरी रचनाओं पर अपना नाम कमाते रहेंगे। इस गाने में युवा पीढ़ी के गायक ने किस कदर मैशप्प गायकों का विरोध किया, इसे गाने को जगर के रूप में दर्शाया गया है और दिखाया गया है कि जागरी( गयाकार जो गाने को गा रहा है) किस तरीके से जागर गा कर मैशप्प वालों के विरुद्ध अपनी भावनाओं को दर्शा रहा है  वही अगर आप इस गाने के डिस्क्रिप्शन को देखोगे तो शायद आपको गुस्सा भी आ सकता है या फिर आप हंसने के लिए मजबूर हो जाओगे

खुली और नंगी चेतावनी – “यह गीत Public Demand पर बना है , इस गीत से जुड़ी एक एक घटना वास्तविक है एवं प्रमाण सहित दर्शाई गई है, जिन चमन भूतियों को बार बार और हर बार यही लग रहा है कि कपिल मोहन को ही क्यों और क्या परेशानी है तो दिमाग और दिल से सोच-विचार करना शुरू कर दें वहां से नहीं जहाँ से मलत्याग करते हैं”..। धन्यवाद

और हाँ -भली कै बिंग्यान

Kapil Mohan (Team Pahadi Viners) Presents – Mashup मसाण (Disstrack 2 Pahadi)

Song – Mashup मसाण

Singer – फ़्लॉप आर्टिस्ट कपिल मोहन

Lyrics – मेरे बुबा जी ने नहीं लिखे

Composition – चुराई हुई नहीं है

Music – मैंने नहीं बनाया

इस गाने को देखने और सुनने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें

 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आप कब तक उत्तराखंड कि महान हस्तियों के गाने गाकर मैशप्प से संस्कृति को बचने का काम करोगे ? जिस तरीके से रानू मंडल फैमस तो हुई लेकिन उन्हें भी कही न कही स्वरकोकिला ने नसीहत दे डाली, अगर आपने लता जी का बयान नही सुना होगा तो हम आपको बताते हैं लता जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अगर मेरे नाम और काम से किसी का भला होता है तो मैं अपने आप को खुशकिस्मत समझती हूं। लेकिन मैं यह भी महसूस करती हूं कि नकल करने से आपको लंबे समय तक सफलता नहीं मिल सकती है। किशोर दा, मोहम्मद रफी, आशा भोसले और मुकेश के गाने गाकर आकांक्षी गायकों को कुछ समय के लिए अटेंशन मिलती है लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं रहता है”।

वही उत्तराखंड के स्वर सम्राट गढरत्न नरेन्द्र सिंह नेगी जी भी कई बार बोल चुके है कि “पिसे हुऐ आटे को ओर मत पिसो” ओर जागर सम्राट पद्मश्री पुरस्कार विजेता प्रीतम भरतवाण भी बोल चुके है कि “ये नये मैशअप बना के पुराने गानो की आत्मा को मार रहे है” साथ साथ मंगलेश डंगवाल जी ने भी कहा है की “आज कल की पीढी को खुद की रचना करनी जरूरी है”